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पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास (Geological History of the Earth in Hindi)

पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास (Geological History of the Earth)

Contents

पृथ्वी का सम्पूर्ण इतिहास 

  • पृथ्वी की आयु निर्धारण के बाद समस्या उठती है कि उत्पत्ति-काल से कर वर्तमान काल तक पृथ्वी किन-किन दशाओं से होकर गुजरी है.

पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास (Geological History of the Earth)

  • यदि पृथ्वी की विभिन्न परतों, उनमें पायी जाने वाली चट्टानों, जीव-विकास आदि का अध्ययन किया जाए तो यह निष्कर्ष निकलता है कि पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद विशेष प्रकार के कई युग हुये हैं जिनमें विशेष प्रकार का जमाव और जीवों का विकास हुआ है.
  • अतः पृथ्वी की बाहरी और आन्तरिक अवस्थाओं में परिवर्तन होते रहे हैं क्योंकि पृथ्वी पर दोनों बाह्य और आन्तरिक शक्तियां हमेशा से उपस्थित रही हैं.
  • पृथ्वी के वर्तमान इतिहास की गणना उस समय से की गई है जबसे पृथ्वी ने ठोस रूप धारण कर लिया है.
  • चट्टानों में जीवाशेषों का मिलना पृथ्वी की आयु की गणना का प्रमुख आधार है.

पृथ्वी के इतिहास का अध्ययन करने से पहले हमें कल्प (Era) युग (Epoch) तथा शक (Periods) के बारे में जानना जरूरी हो जाता है.

पृथ्वी के इतिहास को पांच बड़े हिस्सों में बाँटा जाता है जिन्हें कल्प (Era) के नाम से जाना जाता है.

  • सेनोजोइक कल्प,
  • मेसोजोइक कल्प,
  • पैल्योजोइक कल्प और
  • आद्य कल्प .

इन कल्पों को फिर युगों में विभाजित किया जाता है और ये युग हैं-

  • चतुर्थक युग,
  • तृतीयक युग,
  • द्वितीयक युग और
  • प्रथम युग.

इन युगों को भी छोटे-छोटे भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें ‘शक’ के नाम से जाना जाता है.

पृथ्वी के सम्पूर्ण इतिहास की जानकारी नीचे आनेवाली व्याख्याओं से पूरी हो जाती है

 

पूर्व कैम्ब्रियन या आद्य  कल्प (Precambrian or Archean Era)

  • इस दौरान पृथ्वी की भूपर्पटी का निर्माण हुआ .
  • वाष्प कण जो पृथ्वी के चारों तरफ फैले थे संघनित होकर जल में बदल गए.
  • सम्भवतः पृथ्वी का बहुत सारा भाग मरुस्थल था.
  • इस कल्प के अन्दर केवल आग्नेय चट्टानें ही पायी गई जो बाद में अवसादी (Sedimentary) और कायान्तरित (Metamorphic) चट्टानों में बदल गई.
  • इस कल्प में उत्तरी अमेरिका की सुपीरियर झील के पास करीब 1.2 लाख घन किमी. क्षेत्र आग्नेय चट्टानों से ढक गया और भारत की धारवाड़ चट्टानें और अरावली पर्वत इसी कल्प में विकसित हुए थे.

इस कल्प को तीन भागों में बांटा जाता है.

प्रोटेरोजोइक (Proter0z0ic era)

  • यह काल 600 मिलियन वर्षों के बीच में आता है.
  • स्थल पर कोई जीव नहीं था .
  • केवल सागर में जीव-जन्तु पाये जाते थे.

आर्कियोजोइक(Archaeozoic era)

  • इस काल के अन्दर पृथ्वी पर जीवन का प्रारम्भ हो गया था 
  • जलवायु में परिवर्तन आने शुरू हो गए जिसका अनुमान चट्टानों में घास के अवशेषों से लगाया जाता है.

इयोजोइक (Eoazoic era)

  • इस काल के बारे में खास जानकारी नहीं मिलती है.

पुराजीवी कल्प (Palaeozoic Era)पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास

  • यह बहुत ही बड़ा कल्प है जो 600 मिलियन वर्ष पूर्व से 225 मिलियन वर्ष तक उपस्थित था .
  • इस कल्प के दौरान जीयों और वनस्पतियों का विकास तेज गति से हुआ था.
  • शुरू के काल में वनस्पति और जीवावशेष, इसके पश्चात मछलियों के अवशेष और अन्त में रेंगनेवाले जीवों के अवशेष पाये गए हैं.

इसके निम्नलिखित शक हैं.

कैम्ब्रियन शक (Cambrian Period)

  • समुद्र ने पृथ्वी के बहुत सारे भागों को ढक रखा था .
  • जलवायु शुष्क हो गयी थी .
  • ज्वालामुखी प्रक्रिया शुरू हो गई थी.
  • यह समय 600 से 500 मिलियन वर्ष तक रहा इसमें परतदार शैलों का विस्तार हुआ जो आज भी उपस्थित है.
  • भारत का विन्याचल पर्वत इसी युग की देन है.
  • पहली मछली ने इस युग में ही जन्म लिया .

आर्दोविसियन शक (Ordovician Period)

  • यह युग 500 मिलियन से 440 मिलियन वर्ष पूर्व तर्क रहा.
  • कुछ पर्वतों का निर्माण हुआ.
  • जमीन और समुद्र के बीच की सीमा बदलती रही और अवसाद भी जमा हुआ.
  • इस युग में भी जमीन पर कोई जीव जन्तु नहीं थे.

सिल्यूरियन शक (Silurian Period)

  • इस काल में समुद्र का स्तर उठता और गिरता रहा यह समय 440 मिलियन से 400 मिलियन वर्ष तक रहा.
  • यूरोप में पर्वत निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई जिसके फलस्वरूप स्कैण्डीनेविया के पर्वत और स्कॉटलैण्ड पर्वत का जन्म हुआ इस प्रक्रिया को कैलिडोनियन हलचल (Caledonian Orogenesis) के नाम से भी जाना जाता है.
  • बिना पत्तों के पौधों ने जमीन पर जन्म लिया.

डिवोनियन शक (Devonian Period)

  • इस काल में सूखी जमीन का क्षेत्र बढ़ गया था.
  • इस समय में पर्वतश्रेणियों की प्रक्रिया तेज हो.
  • गई थी जो सिल्यूरियन शक में शुरू हुई थी.
  • जंगल का जन्म जमीन पर हो गया था.
  • मछलियों की और जातियों का विकास हुआ जिसमें सार्क मछली भी थी.
  • इसे मत्स्य-युग के रूप में भी जाना जाता है.
  • इसकी अवधि 400 मिलियन से 350 मिलियन वर्ष तक रही.

कार्बनीफेरस शक (Carboniferous Period)

  • इस काल का महत्व कोयले के निर्माण से है.
  • इस युग के दो उपभाग हैं.

     मिशीशीपीअन युग (Mississippian Period)

  • यह कोयले के निर्माण का पहला चरण था जिसमें सड़ा-गला वनस्पति, पीट और बाद में कोयले में बदल गया.
  • लेड और जिंक जैसे खनिज का भी निर्माण हुआ .
  • प्रवाल रोधिकाओं. का भी निर्माण शुरू हो गया था .

     पेन्सालिवनीअन युग (Pennsylvanian Period)

  • यह युग कोयले के निर्माण का दूसरा चरण था .
  • जमीन धंस गई जिसकी वजह से बहुत बड़ा दलदल क्षेत्र बन गया.
  • दूसरी जगहों पर समुद्र का तल उभर कर सूखा क्षेत्र बन गया.
  • सदाबहार पेड़ों का जन्म हुआ, रेप्टाइल्स भी जमीन पर आ गए.
  • इन दोनों युगों की अवधि 350 मिलियन से 270 मिलियन वर्ष तक थी.

पार्मियन शक (Permian Period)

  • सिल्युरियन काल में शुरू हुई पर्वत निर्माणकारी कैलिडोनियन हलचल इस युग तक जारी रही
  • इसे हर्सीनियन हलचल के नाम से जाना जाता है.
  • इस युग में बने पर्वत फ्रांस, स्पेन और उत्तरी अमेरिका के एप्लेशियन पर्वतीय क्षेत्र में पाये जाते हैं.
  • पिघले हुए हिमानी ने बहुत बड़े अवसादी जमाव को जन्म दिया.
  • इसकी अवधि 270 मिलियन से 225 मिलियन वर्ष तक रही.
  • पतझड़ पौधों का भी जन्म हुआ.

मेसोजासेइक कल्प (Mesozoic Era)पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास

  • इस कल्प की अवधि 225 मिलियन और 70 मिलियन वर्ष तक है.
  • यह पिछले कल्प कि कुलना में शान्त रहा.
  • इसे तीन शकों में बाँटा जाता है.

ट्रियासिक शक (Triassic Period)

  • इसकी अवधि 225 मिलियन से 180 मिलियन वर्ष थी.
  • जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी सूखा था.
  • ज्वालामुखी प्रक्रियाएं शुरू हो गई थी.
  • तांबा और यूरेनियम का जमाव बन गया था.
  • हिमालय और आल्पस की जगह टेशीस सागर उपस्थित था
  • पैन्जिया नाम के महाद्वीप का विभाजन होना शुरू हो गया था.
  • इस काल को रेंगने वाले जीवों का काल कहा जाता है.

जुरैसिक शक (Jurassic Period)

  • पर्वतों का अपरदन बहुत तेजी से हुआ.
  • समुद्र द्वारा जमीनों का भी अपरदन हुआ.
  • इस काल में रेंगने वाले रीढ़ विहीन जीवों की अधिकता थी.
  • इस अवधि में साइबेरिया तथा मंगोलिया के भागों पर 2.5 लाख घन किमी. ज्वालामुखी पदार्थों का पूरी तरह विस्तार हुआ.
  • डाइनोसार (Dinosaurs) का आकार बहुत बड़ा हो गया.

क्रिटैशियस शक (Cretaceous Period)

  • इस काल में कोयले का निर्माण हुआ.
  • समुद्र जमीन का अतिक्रमण करता गया.
  • इस समय की चट्टानों में चूना-पत्थर की मात्रा ज्यादा थी.
  • भारत के प्रायद्वीपीय भाग पर लावे का जमाव इसी काल में हुआ था.
  • फूल वाले पौधों का भी विकास हुआ.
  • इस युग में रेंगने वाले जीवों की बहुलता थी .
  • इसकी अवधि 135 मिलियन से 70 मिलियन वर्ष थी.

सेनोजोइक कल्प (Cenozoic Era)

  • इस अवधि की विशेषता यह है कि इसी काल में सबसे पहले दूध पिलाने वाले जीवों का आगमन हुआ.
  • इसकी अवधि 70 मिलियन से 1 मिलियन वर्ष तक रही.
  • सेनोजोइक कल्प को टर्शियरी युग (Tertiary Period) के नाम से भी जाना गया है.
  • इस युग को पाँच शकों में बाँटा जाता है.

पैलियोसीन युग (Palaeocene Epoch)

  • इस अवधि का विस्तार 70 मिलियन से 60 मिलियन वर्ष तक रहा.
  • नयी पर्वत श्रेणियाँ बनती रहीं.
  • संसार के कुछ हिस्सों में उपजाऊ भूमि बनी.
  • डाइनोसार खत्म हो चुके थे.
  • इसकी अवधि 70 मिलियन से 60 मिलियन वर्ष तक रही.

इयोसीन युग (Eocene Epoch)

  • इस अवधि में जमीन का नीचे घंसना व समुद्र द्वारा अतिक्रमण बढ़ा .
  • अटलांटिक महासागर ने अपना आज का आकार इसी समय ही धारण कर लिया था.
  • इसकी अवधि 60 मिलियन से 40 मिलियन वर्ष तक रही.

ओलिगोसीन युग (Oligocene Apoch)

  • इस अवधि में समुद्र जमीन से पीछे हट गया .
  • पर्वत निर्माणकारी शक्तियां और ज्वालामुखी प्रक्रिया सक्रिय ले गयी जिससे हिमालय, आल्पस तथा राकीज पर्वत मालाओं का विकास हुआ.
  • इस युग का विस्तार 40 मिलियन से 25 मिलियन वर्ष तक रह्म .

मायोसीन युग (Miocene Epoch)

  • इस युग में समुद्र का जमीन से पीछे हटना जारी रहा.
  • पर्वत निर्माणकारी शक्तियां और ज्वालामुखी प्रक्रिया और भी तेज हो गई.
  • फूल वाले पौधों का विकास आज की तरह के पौधों के जैसा हो गया .
  • इसकी अवधि 25 मिलियन से 10 मिलियन वर्ष तक रही.

प्लायोसीन युग (Pliocene Epoch)

  • इस युग में पर्वत निर्माण का काम कम से गया पृथ्वी ने अपना आकार ग्रहण कर लिया.
  • जलवायु ठंडी हो गयी थी.
  • इसकी अवधि 10 मिलियन वर्ष से 1 मिलियन वर्ष तक है.

 

चतुर्थक शक (Quarternary  Period)पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास

  • यह अवधि 10 लाख वर्ष से शुरू होकर अभी तक जारी है.
  • इसे दो युगों (Epoch) में बांटा जाता है.

प्लीयोटोसीन युग (Pleistocene Epoch)

  • इसे हिमयुग के नाम से जाना जाता है.
  • इस अवधि में तापमान कम होने के कारण करीब करीब सारे महाद्वीप बर्फ से ढक गए जिसमे दक्षिणी अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया, एण्टार्कटिका और दक्षिणी अफ्रीका शामिल था.
  • अतः यह एक जलवायु परिवर्तन का समय था.
  • यूरोप और उत्तरी अमेरिका में चार छोटे-छोटे हिमयुगों का आगमन हुआ था.
  • इन चार युगों के बीच में शान्त समय भी रहा है.
  • इस समय में दूध पिलाने वाले जीवों का बहुत अधिक विकास हुआ.
  • उत्तरी अमेरिका की ग्रेट लेक्स का जन्म इसी समय में हुआ था.

आधुनिक युग (Recent Epoch)

  • इस अवधि के अन्दर बर्फ की चादर का आकार कम हो गया क्योंकि गर्मी की वजह से बर्फ पिघल गई थी.
  • समुद्र की सतह उपर उठ गई और जमीन का अपरदन शुरू हो गया था.
  • और उन सभी स्थलाकृतियों का विकास हुआ जिसे हम आज जानते हैं.
  • यह काल आज से 10 हजार वर्ष पहले शुरू हुआ था.
  • इस काल के दौरान मेधावी मानव (Hormosapiens) का आगमन हुआ था.

 

पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास (Geological History of the Earth)

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