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सल्तनत काल कृषि एवं राजस्व व्यवस्था (Sultanate period agriculture and revenue system)

सल्तनत काल कृषि एवं राजस्व व्यवस्था (Sultanate period agriculture and revenue system)-सल्तनत काल में राज्य की समस्त भूमि मुख्यतः चार वर्गों में विभक्त थी

सल्तनत काल कृषि एवं राजस्व व्यवस्था (Sultanate period agriculture and revenue system)

सल्तनत काल कृषि एवं राजस्व व्यवस्था Sultanate period agriculture and revenue system

1. अक्ता

  • इस भूमि से मुक्ति व वली लगान वसूल करते थे तथा अपना खर्च चलाने के पश्चात् बची राशि को शाही-कोष में जमा करवाते थे.
  • “ख्वाजा’ नामक अधिकारी वली के कार्यों का निरीक्षण करता था.
  • उल्लेखनीय है कि ये अधिकारी इस भूमि के मालिक नहीं होते थे.

2. खालसा

  • यह भूमि पूर्णतः केन्द्र के अधीन होती थी.
  • ‘चौधरी’ और ‘मुकद्दम’ नामक पदाधिकारी इस भूमि से कर एकत्रित करते थे.
  • ‘आमिल’ नामक अधिकारी (‘शिक‘ का प्रमुख) अपने क्षेत्र से कर वसूल करके शाही-कोष में जमा करवाता था.

3. अनुदान

  • यह कर मुक्त भूमि होती थी जो पुरस्कार, उपहार, सेवानिवृत्त अधिकारियों को तथा धार्मिक अनुदान के रूप में दी जाती थी.
  • इस भूमि को प्राप्त करने वाले का भूमि पर वंशानुगत अधिकार होता था.
  • उल्लेखनीय है कि यह भूमि कर-मुक्त होती थी.

4. सामन्तों की भूमि

  • यह भूमि सुल्तान के अधीन हिन्दू राजाओं, सामन्तों या जागीरदारों की भूमि थी जो प्रतिवर्ष निश्चित कर सुल्तान को देते थे .

कर व्यवस्था

  • सल्तनत काल में मुख्य रूप से पाँच प्रकार के कर प्रचलित थे.
  • मुस्लिम विधिविज्ञों ने करों को धार्मिक करों एवं धर्मनिरपेक्ष करों में विभक्त किया.

1. उश्न कर

  • इस कर के तहत केवल मुस्लिमों से उपज का 10 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत भाग लिया जाता था.
  • प्राकृतिक साधनों से सिंचित भूमि पर 10 प्रतिशत तथा मनुष्यकृत साधनों से सिंचित भूमि पर 5 प्रतिशत कर लिया जाता था.

2. खराज कर

  • यह कर गैर-मुस्लिमों से लिया जाता था.
  • किन्तु यदि खराज वाली भूमि पर कोई मुस्लिम कृषि करता था तो उससे भी यह कर लिया जाता था.
  • कर वसूल करने की दर उपज का 1/3 भाग से अधिक तथा 2/3 भाग से कम होती थी.

3. खम्स कर

  • यह युद्ध में लूट से प्राप्त धन में राज्य का भाग होता था.
  • यह कुल लूट का 1/5 भाग होता था तथा 4/5 भाग सैनिकों में बांट दिया जाता था.
  • अलाउद्दीन खिलजी तथा मुहम्मद तुगलक के समय में कुल लूट का 4/5 भाग राज्य कोष में जमा करवाया जाता था तथा 1/5 भाग सैनिकों में बांटा जाता था.

4. जकात कर

  • यह केवल धनवान मुस्लिमों से प्राप्त धार्मिक कर होता था.
  • यह कर आय का 2.5 प्रतिशत लिया जाता था.
  • इसका सम्पूर्ण भाग मुस्लिमों के कल्याण व धर्म प्रचार हेतु व्यय किया जाता था.
  • एक अन्य धार्मिक कर ‘सदका’ का भी उल्लेख मिलता है जिसे प्रायः जकात ही मान लिया जाता था.

5. जजिया कर

  • आधुनिक इतिहासकारों ने इस कर को धर्म-निरपेक्ष कर मानते हुए कहा है कि यह कर गैर-मुस्लिमों से इसलिए लिया जाता था, क्योंकि वे सैनिक सेवा से मुक्त थे.
  • स्त्रियों, बच्चों, भिखारियों, ब्राह्मणों व पागलों से यह कर नहीं लिया जाता था.
  • फिरोजशाह तुगलक ने ब्राह्मणों से भी जजिया वसूल किया.
  • सम्पन्न वर्ग से 40 टंका, मध्यम वर्ग से 20 टंका तथा सामान्य वर्ग से 10 टंका प्रतिवर्ष जजिया कर के रूप में लिया जाता था.
  • इन करों के अतिरिक्त मुसलमानों से 2.5 प्रतिशत तथा गैर-मुस्लिमों से 5 प्रतिशत अतिरिक्त कर व्यापारिक कर के रूप में लिया जाता था.
  • अलाउद्दीन खिलजी ने अनेक करों  का बोझ जनता पर लाद दिया था.
  • अलाउद्दीन खिलजी ने आवास तथा चारागाह कर भी वसूल किए.
  • फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई कर भी लगाया.
  • उल्लेखनीय है कि फिरोज तुगलक ने अलाउद्दीन खिलजी के समय से लागू लगभग 24 अतिरिक्त करों को समाप्त किया.

लगान व्यवस्था

सल्तनत काल (Sultanate period) में लगान निर्धारित करने की निम्न विधियां प्रचलन में थीं

बँटाई

  • बँटाई से भाव था कि कृषक की उपज को अथवा उपज के मूल्य को सरकार तथा कृषक के मध्य बांटना.
  • इस प्रणाली के अधीन राज्य के प्रतिनिधि दो प्रकार से बँटाई करते थे.
  • प्रथम, फसल तैयार होने के समय कुल पैदावार का मूल्य निर्धारित करके करों को निर्धारित किया जाता था;
  • द्वितीय, तैयार फसलों के माप-तौल के आधार पर करों को निर्धारित किया जाता था.

सल्तनत काल में बँटाई प्रणाली को अनेक नामों यथा-किस्मत-ए-गल्ला, गल्ला-बक्शी व हासिल आदि से पुकारा जाता था. बटाई भी तीन प्रकार की होती थी-

खेत बँटाईखड़ी फसल या फसल बोने के तुरन्त बाद ही खेत बाँट कर करों को निर्धारित करना .
2लंक बँटाईभूसे से अलग किए बिना ही कटी हुए फसल का कृषक वे सरकार के बीच बँटवारा किया जाता था.
3रास बँटाईखलिहान में अनाज से भूसा अलग करने के बाद सरकार के हिस्से को निर्धारित किया जाता था.

उल्लेखनीय है कि बँटाई व हासिल प्रणाली सल्तनत के प्रत्यक्ष शासन क्षेत्र में अपनाई गई थी.

मुक्ताई

  • सल्तनत काल में लगान निर्धारित करने की मिश्रित प्रणाली को ‘मुक्ताई‘ के नाम से जाना जाता था.

मसाहत

  • यह कर निर्धारण का एक अन्य तरीका था.
  • इसके अनुसार भूमि की नाप-जोख करने के पश्चात् उसके क्षेत्रफल के आधार पर लगान निर्धारित किया जाता था.
  • इस प्रणाली को अलाउद्दीन खिलजी ने आरम्भ किया था.

सल्तनत कालीन सुल्तानों ने कृषि की उन्नति तथा कृषक व राज्य के मध्य सामंजस्य स्थापित रखने का भरसक प्रयास किया.

 

सल्तनत काल कृषि एवं राजस्व व्यवस्था (Sultanate period agriculture and revenue system)

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