सविनय अवज्ञा आंदोलन और साम्प्रदायिक निर्णय (Civil Disobedience Movement and Communal Award)

सविनय अवज्ञा आंदोलन और साम्प्रदायिक निर्णय (Civil Disobedience Movement and Communal Award) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

सविनय अवज्ञा आंदोलन और साम्प्रदायिक निर्णय (Civil Disobedience Movement and Communal Award) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

सविनय अवज्ञा आंदोलन और साम्प्रदायिक निर्णय (Civil Disobedience Movement and Communal Award)

ग्यारह सूत्रीय प्रस्ताव (Eleven points proposal)

  • महात्मा गांधीजी ने वायसराय के सामने एक प्रस्ताव रखा कि यदि वह उनकी ‘ग्यारह सूत्रीय’ (Eleven Points) मांग को स्वीकार कर ले तो वह अपना घोषित सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस ले लेंगे.
  • इन ग्यारह सूत्रीय मांगों में प्रमुख थीं-
  1. भू-राजस्व में कटौती,
  2. नमक-कर में कमी,
  3. मिलिट्री और सिविल खर्च में कटौती करना,
  4. राजनीतिक बंदियों की रिहाई,
  5. विदेशी कपड़ों पर शुल्क में बढ़ोत्तरी आदि.
  • महात्मा गांधीजी को किसानों, मजदूरों, व्यवसायी वर्ग आदि का पूरा-पूरा सहयोग प्राप्त था.
  • कुछ समय तक सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बाद फरवरी, 1930 में कार्यकारी समिति की साबरमति आश्रम में एक बैठक हुई और महात्मा गांधीजी से पूरी शक्ति के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने की बात कही गई.
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधीजी के प्रसिद्ध डांडी मार्च के साथ आरंभ हुआ.
  • 24 दिन में 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ जिनमें सरोजिनी नायडू भी सम्मिलित थीं, गांधीजी साबरमति आश्रम से 375 कि. मी. दूर गुजरात के समुद्र-तट पर स्थित डांडी गांव पहुंचे.
  • गांधीजी और उनके दल का जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ.
  • उनकी यात्रा, उनके भाषणों तथा जनता पर उनके प्रभाव की रिपोर्ट प्रतिदिन समाचार-पत्रों में छपती रहीं.
  • 5 अप्रैल, 1930 को गांधीजी डांडी पहुंच गये और 6 अप्रैल को प्रातः प्रार्थना के बाद समुद्र तट से मुट्ठी भर नमक उठाया और इस प्रकार ब्रिटिश सरकार के उस कानून को तोड़ दिया जिसके अनुसार सरकारी ठेके के अलावा लिया हुआ नमक रखना गुनाह था.
  • गांधीजी द्वारा प्रारम्भ किया गया सविनय अवज्ञा आंदोलन तुरंत ही आंधी की तरह पूरे देश में फैल गया.
  • जगह-जगह नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा गया.
  • जहां नमक बनाने की सुविधा नहीं थी वहां दूसरे कानूनों को तोड़ा गया.
  • महाराष्ट्र कर्नाटक और मध्य भारत में जंगल कानून तोड़े गए और पूर्वी भारत में ग्रामीण जनता ने चौकीदारी कर अदा करने से इन्कार कर दिया.
  • देश में हर जगह जनता हड़तालों, प्रदर्शनों और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार में भाग लेने लगी और कर अदा करने से इन्कार करने लगी.
  • लाखों भारतीयों ने सत्याग्रह किया. देश के अनेक भागों में किसानों ने जमीन की मालगुजारी और लगान देने से इन्कार कर दिया.
  • उनकी जमीनें जब्त कर ली गई.
  • इस आंदोलन की प्रमुख विशेषता स्त्रियों की बड़ी संख्या में भागीदारी थी.
  • ‘सीमांत गांधी’ के नाम से जाने जानेवाले खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में पठानों ने खुदाई खिदमतगार (ईश्वर के सेवक) नामक संगठन बनाया जो जनता के बीच “लाल कुर्ती वाले” कहलाते थे.
  • ये लोग अहिंसा और स्वाधीनता संघर्ष को समर्पित थे.
  • पेशावर की एक महत्वपर्ण घटना यह थी कि गढ़वाली सिपाहियों की दो प्लाटूनों ने अहिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इन्कार कर दिया. इसके नेता चन्द्र सिंह गढ़वाली थे.
  • जिस कारण बाद में उनका कोर्ट मार्शल किया गया और लम्बी जेल सजाएं दी गई.
  • इससे स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रवाद की भावना भारतीय सेना तक फैलने लगी थी.
  • आंदोलन में मणिपुरी और नागालैंड की जनता की भागीदारी भी भरपूर रही.
  • आंदोलन की तेजी को देखते हुए सरकार द्वारा पूर्व की तरह निर्मम दमन, आंदोलनकारियों पर लाठी और गोलियों की बौछार आदि के द्वारा इसे कुचलने के प्रयास किए गए.
  • 5 मई, 1930 को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया तथा साथ ही अनेकों सत्याग्रही गिरफ्तार किए गए.
  • कांग्रेस को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया.
  • प्रेस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए.
  • सरकार की पाशविक दमन की नीति के बावजूद सविनय अवज्ञा आंदोलन चलता रहा.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *