आधुनिक भारत में दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

आधुनिक भारत दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA)

  • 19वीं शताब्दी के सामाजिक और धार्मिक सुधार आन्दोलनों के प्रवर्तक उच्च वर्गीय हिन्दू थे.
  • इन्होंने अस्पृश्यता और जात-पांत की समाप्ति के लिए अनेक प्रयास किए.
  • किन्तु इन्हें अपने प्रयासों में आंशिक सफलता ही मिली.
  • कालान्तर में इन दलित जातियों में से ऐसे नेता उभर कर सामने आए.
  • जिन्होंने स्वयं समानता के अधिकार के लिए आन्दोलन चलाया.

आधुनिक भारत में दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

न्याय दल (The Justice Party) 

  • श्री पी. त्यागराज और डॉ. टी. एम. नैयर के प्रयासों से 1917 में दक्षिण भारतीय उदारवादी संघ या न्याय पार्टी की स्थापना की गई.
  • 1937 में रामास्वामी नाइकर इस दुल के सभापति चुने गए.
  • उन्होंने हिन्दू धर्म की भत्र्सना की और कहा कि यह ब्राह्मणों के अनियंत्रित अधिकारों का पक्षपोषक है.
  • 1949 में इस दल का विभाजन हो गया और असन्तुष्ट सी. एन. अन्नादुराए ने द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) की स्थापना की.
  • 1967 में अन्नादुराए ने प्रथम द्रमुक सरकार का गठन किया.

श्री नारायण धर्म परिपालक योग 

  • श्री नारायण गुरू ने केरल तथा केरल के बाहर कई स्थानों पर एस. एन. डी. पी. या श्री नारायण धर्म परिपालन योगम नामक संस्था की स्थापना की.
  • श्री नारायण “एझवा” (एक अस्पृश्य जाति) जाति के थे.
  • उन्होंने दलित जातियों के उत्थान के लिए अनेक प्रयास किए.
  • उन्होंने कई मन्दिर बनवाए जो सभी वर्गों के लिए खुले थे.
  • उन्हें अस्पृश्य जातियों को पिछड़ी जातियों में परिवर्तित करने में विशेष सफलता मिली.
  • श्री नारायण गुरू ने महात्मा गांधी की भी निम्न जातियों के प्रति केवल मौखिक सहानुभूति प्रकट करने के लिए आलोचना की.

सत्य शोधक समाज 

  • भारत के पश्चिमी भाग में ज्योतिराव गोविन्दराव फूले ने दलित या निम्न जातियों के लिए संघर्ष किया.
  • उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं की कमजोर वर्गों के लोगों के हितों की अनदेखी करने के लिए आलोचना की.
  • 1873 में उन्होंने सत्य शोधक समाज (सत्य की खोज करने वाला समाज) की स्थापना की.
  • इस समाज का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को सामाजिक न्याय दिलवाना था.

डॉ.भीमराव अम्बेडकर की भूमिका 

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को एक महार कुल (एक अस्पृश्य हिन्दू कुल) में महू में हुआ.
  • 1923 में वे बैरिस्टर बन गए.
  • जुलाई, 1924 में उन्होंने बम्बई में ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की.
  • इसका उद्देश्य अस्पृश्य लोगों की नैतिक और भौतिक उन्नति करना था.
  • 1930 में अम्बेडकर ने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया.
  • उन्होंने अछूतों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की मांग की.
  • लन्दन में हुए तीनों गोलमेज सम्मेलनों में अम्बेडकर ने अछूतों के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया.
  • 17 अगस्त, 1932 के ब्रिटिश प्रधानमंत्री की साम्प्रदायिक निर्णय में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों का प्रावधान था.
  • महात्मा गांधी इससे बहुत दु:खी हुए.
  • उन्होंने इस व्यवस्था को हटाने के लिए आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया.
  • अन्ततः “पूना समझौते” के द्वारा दलित वर्गों के लिए साधारण वर्ग में ही सीटों का आरक्षण किया गया.
  • अप्रैल, 1942 में उन्होंने अनुसूचित जातीय संघ का एक अखिल भारतीय दल के रूप में गठन किया.
  • भारत के संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा में डॉ. अम्बेडकर को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया.
  • उनके प्रयासों से भारत के संविधान में दलित जातियों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए.

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