सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था (Sultanate Period Social & Religious status)

सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था (Sultanate Period  Social and Religious status)-

सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था (Sultanate Period Social and Religious status)

सल्तनत कालीन सामाजिक अवस्था

  • इस काल में समाज में मुख्यतः दो वर्ग थे-मुसलमान और हिन्दू 

मुसलमान आगे दो मुख्य वर्गों में विभाजित थे

  1. तुर्क-अफगान, अरबी और ईरानी जाति के और
  2. भारतीय मुसलमान जो पहले हिन्दू थे.

भारतीय मुसलमानों से सौतेला व्यवहार किया जाता था. मुसलमान एक अन्य दृष्टिकोण से दो वर्गों-अहल-ए-सैयफ (सैनिक वर्ग तथा अहल-ए-कलम (पढ़े-लिखे लोग) में विभक्त थे.

  • मुसलमान नैतिक पतन की ओर बढ़ रहे थे.
  • इसका प्रमुख कारण यह था कि उनके पास हिन्दू राजा-महाराजाओं के राजकोषों और लूट का बहुत-सा धन एकत्र था.
  • इसलिए बिना परिश्रम के कमाए धन को उन्होंने सुरासुन्दरी में पानी की तरह बहाया.
  • कई सुल्तान (कैकुबाद, कुतुबुद्दीन मुबारक शाह आदि) स्वयं ही गिरे हुए चरित्र के थे.
  • ‘दास प्रथा’ का प्रचलन भी था.
  • किन्तु उस समय दास प्रथा बुरी नहीं थी. यह एक सामाजिक संस्था बन गई थी.

चार प्रकार के दास थे-

  1. क्रीत (खरीदे हुए),
  2. लब्ध (दान अथवा भेंट स्वरूप प्राप्त)
  3. युद्ध में प्राप्त दास 
  4. आत्म विक्रेता दास
  • यदि कोई दास अपने स्वामी की बड़ी सेवा करता अथवा अपने स्वामी के प्राणों की रक्षा करता था तो उसका स्वामी उसे स्वतन्त्र कर देता था.
  • दासों से अच्छा व्यवहार किया जाता था.
  • उन्हें अपनी योग्यतानुसार आगे बढ़ने के अवसर दिए जाते थे.
  • कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश तथा बलबन भी दास थे तथा अपनी योग्यता के बल पर वे सुल्तान पद तक पहुंचे.
  • राजसी ठाठ-बाट के प्रदर्शन में मुसलमान शासक सबसे आगे थे.

सल्तनत कालीन स्त्रियोंकी अवस्था (सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था)

  • हिन्दुओं के घरों में स्त्रियों को गृह-स्वामिनी माना जाता था.
  • कई स्त्रियां बड़ी विदुषी थीं.
  • स्त्रियाँ नृत्य, संगीत, चित्रकला आदि की शिक्षा प्राप्त करती थीं.
  • फिर भी स्त्रियों की अवस्था ठीक नहीं थी.
  • बहु-विवाह प्रथा प्रचलित थी तथा विवाह की पवित्रता कम हो गई थी.
  • सुल्तान कैकुबाद और  मुबारक शाह के समय नारियों का महत्व और सम्मान और भी कम हो गया.
  • पर्दे की प्रथा का भी प्रचलन था.
  • एक मुस्लिम विधवा दूसरा विवाह कर सकती थी, किन्तु हिन्दू स्त्री ऐसा नहीं कर सकती थी.
  • सती–प्रथा तथा जौहर की प्रथा भी प्रचलित थी.
  • सती होने से पूर्व सुल्तान की अनुमति लेनी अनिवार्य थी.
  • हिन्दू स्त्रियों की दशा इतनी खराब हो गई थी कि (बरनी के अनुसार) हिन्दू स्त्रियों को मुसलमानों के घरों में काम-काज करने के लिए मजबूरन जाना पड़ता था.
  • सरकार हिन्दुओं को मुसलमान बनाने हेतु कई सुविधाएँ पेश करती थी.
  • सुल्तान खुसरो के समय हिन्दुओं की दशा में थोड़ा सुधार हुआ.
  • फिरोज तुगलक ने ब्राह्मणों पर भी जजिया लगाया तथा सिकन्दर लोदी ने हिन्दुओं को दण्डित करना शुरू किया.
  • आर्थिक संकट न होने पर भी हिन्दुओं की दशा दासों जैसी हो गई .
  • हिन्दू लोग वर्ण-व्यवस्था का कठोरता से पालन करते थे. चरित्र-सम्बन्धी अपराधों के लिए कठोर दण्ड दिए जाते थे.
  • राजकुमार मसऊद की माता को भी व्यभिचार के अपराध में पत्थर मार-मार कर मार दिया गया.
  • लोगों को धन इकट्ठा करने में बड़ी रुचि थी .
  • गधे की सवारी घृणास्पद समझी जाती थी.
  • लोग तन्त्र-मन्त्र तथा चमत्कार आदि में विश्वास रखते थे.
  • कन्या के जन्म को अशुभ माना जाता था.
  • कवि खुसरो ने अपनी पुत्री के जन्म पर दुःख व्यक्त किया.

लोगों के आचार और व्यवहार (सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था)

  • लोग माँसाहारी भी थे व शाकाहारी भी.
  • उच्च वर्गों में मदिरा और अफीम का उपयोग बढ़ गया था.
  • जन साधारण ज्वार व बाजरा खाते थे.
  • दूध, घी, मक्खन, शक्कर आदि का प्रयोग भी किया जाता था.
  • हिन्दू और मुसलमान दोनों ही अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध थे.
  • सब लोग विभिन्न धातुओं के आभूषण पहनते थे.
  • हिन्दू लोग रक्षा-बन्धन, होली, दशहरा, वसन्तोत्सव इत्यादि मानते थे .
  • परन्तु मुस्लिम शासकों ने उन पर्वो पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध लगा दिए थे.
  • लोग धूत-क्रीड़ा, आखेट, मल्ल-युः, पशु-युद, संगीत, कला, प्रदर्शनी, नाटक इत्यादि से अपना मनोरंजन करते थे.
  • दक्षिण भारत के लोगों के आचार और व्यवहार उत्तर भारत के लोगों से कुछ भिन्न थे.
  • आत्म-बलिदान और सती–प्रथा भी, प्रचलित थी.
  • ब्राह्मणों का आदर किया जाता था.
  • विद्या प्राप्ति हेतु बहुत परिश्रम किया जाता था.
  • नैयर स्त्रियों में बहु-पति प्रथा प्रचलित थी.
  • मलाबार में दण्ड-विधान बहुत कठोर था.
  • इब्नबतूता के अनुसार कभी-कभी तो नारियल की चोरी के लिए भी प्राण दण्ड दिया जाता था.

सल्तनत कालीन धार्मिक अवस्था

  • उस समय भारत में मुख्यतः हिन्दू और मुसलमान धर्मों की प्रमुखता थी.
  • सल्तनत के सुल्तान तथा भारत में बसे मुसलमान अधिकतर कट्टर सुन्नी थे.
  • उन्होंने हिन्दुओं और शिया, करमानी, मैहदवी आदि मुसलमान सम्प्रदायों के प्रति दमनात्मक नीति अपनाई.
  • सूफी सन्तों को भी कई प्रकार के कष्ट सहने पड़े.
  • हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के भरसक प्रयत्न किए गए.
  • कई हिन्दुओं ने इस्लाम ग्रहण किया.
  • किन्तु ऐसे लोग बहुत कम थे जिन्होंने इस्लाम के सिद्धान्तों के प्रभावाधीन इसे ग्रहण किया हो.
  • हिन्दू तथा मुसलमान एक ही राज्य में रहते हुए एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रहे.
  • हिन्दुओं को धार्मिक और राजनीतिक कारणों से मुसलमानों के असंख्य अत्याचार सहने पड़े.
  • हिन्दुओं पर अनेक प्रतिबन्ध लगाए गए थे.
  • मुसलमानों के चरित्र व शक्ति का भी पतन होने लगा था.
  • मुसलमान परिश्रम से दूर भागने लगे थे और ऐश्वर्यशाली जीवन बिताने लगे थे.
  • मुगल काल से पूर्व हिन्दू जाति ने रामानन्द, चैतन्य महाप्रभु, गुरु नानक आदि भक्तों को पैदा किया.
  • मुसलमानों के बीच सूफियों ने सुन्नियों की श्रेष्ठता को चुनौती दी.
  • सूफियों का कहना था कि उलेमा ने कुरान शरीफ की गलत व्याख्या की है.
  • उनका विचार था कि सतयुग आने वाला है.
  • सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था

सल्तनत कालीन जैन तथा बौद्ध धर्म,शैव वैष्णव आदि सम्प्रदाय

  • जैन तथा बौद्ध मत भी अस्तित्व में थे, किन्तु इनका प्रभाव नाममात्र ही रह गया था.
  • जैन धर्म केवल भारत के पश्चिमोत्तर तथा राजस्थान में ही सीमित हो गया था.
  • बौद्ध धर्म में महायान सम्प्रदाय प्रगति पर था.
  • बौद्धों का प्रभाव भारत के पश्चिमोत्तर और मध्य देश में अधिक था.
  • महायान बौद्ध विद्वानों का प्रभाव कम हो गया था.
  • हिन्दू धर्म में शैव, वैष्णव आदि सम्प्रदायों का प्रचलन था.
  • शैवों के अनेक सम्प्रदाय थे-पाशुपत, कापालिक, वीरशैव, शिव सिद्धान्त, लिंगायत आदि .
  • धीरे-धीरे यह मत समस्त भारत में फैल गया.
  • उन्होंने ‘वाम मार्ग’ का सिद्धान्त चलाया.
  • इन लोगों ने भक्ति पर जोर दिया तथा वैष्णव आचार्यों ने उनका समर्थन किया.

वैष्णवों के चार मुख्य सम्प्रदाय थे-

  1. श्री सम्प्रदाय,
  2. ब्रह्म सम्प्रदाय,
  3. रूद्र सम्प्रदाय तथा
  4. सनकादि सम्प्रदाय 
  • रामानुज, गुरुब्रह्मा, माधवाचार्य, विष्णु स्वामी, वल्लभाचार्य, निम्बार्क आचार्य आदि विभूतियों ने वैष्णव मत के इन सम्प्रदायों का प्रचार किया.

सल्तनत काल सामाजिक तथा धार्मिक अवस्था (Sultanate Period  Social and Religious status)

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