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अरबों की विजय के कारण और उनकी शासन व्यवस्था

अरबों की विजय के कारण और उनकी शासन व्यवस्था (MEDIEVAL INDIA)

अरबों की विजय के कारण (1) अरब सैनिकों को नूतन अरब रणनीति का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त था तथा अरबों के पास अच्छी नस्ल के सैनिक-घोड़े थे. (2) मुहम्मद-बिन-कासिम का योग्य सैनिक नेतृत्व. (3) राजा दाहिर निरकुंश, अयोग्य, धर्मान्ध व अलोकप्रिय था. उसने अरबों को सिन्धु नदी के पार ही रोकने का प्रयत्न नहीं किया. (4) […]

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अरबों द्वारा सिंध की विजय MEDIEVAL INDIA

अरबों द्वारा सिंध की विजय मध्यकालीन भारत (MEDIEVAL INDIA)

अरबों द्वारा सिंध की विजय मध्यकालीन भारत (MEDIEVAL INDIA)–चीनी यात्री ह्वेनसाँग के समय सिन्ध में शूद्र शासक का राज्य था. शूद्र वंश का अन्तिम शासक साहसी (Sahasi) था. उसके उपरान्त उसुके ब्राह्मण मन्त्री छाछा (Chhachha) ने उसके राज्य पर अधिकार कर लिया तथा उसकी विधवा रानी से विवाह कर लिया. छाछा के पश्चात् क्रमशः चन्द्र

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इस्लाम का उदय MEDIEVAL INDIA

इस्लाम का उदय मध्यकालीन भारत (MEDIEVAL INDIA)

इस्लाम का उदय मध्यकालीन भारत (MEDIEVAL INDIA) –इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगम्बर मुहम्मद साहब थे. कुर्रेश जनजाति के हाशिम के पुत्र अब्दुल्ला के यहाँ मुहम्मद साहब का जन्म लगभग 570 ई. में अरब के मक्का नामक स्थान पर हुआ. उनके जन्म से पूर्व उनके पिता का और उनकी छह वर्ष की आयु में उनकी माता

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स्वराजवादी Swarajists स्वराज पार्टी की स्थापना Swaraj Party

स्वराजवादी (Swarajists)स्वराज पार्टी की स्थापना (Swaraj Party)

स्वराजवादी (Swarajists)स्वराज पार्टी की स्थापना (Swaraj Party)-असहयोग आन्दोलन और खिलाफत आन्दोलन की समाप्ति के उपरान्त 1922-28 के बीच देश की राजनीति में अनेक घटनाएं घटित हुई. नेताओं के बीच आन्दोलन के बाढ़ की निष्क्रियता से बचने के लिए उठाये जाने वाले कदमों के बारे में गहरे मतभेद थे. एक ओर जहां पंडित मोतीलाल नेहरु और

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खिलाफत आन्दोलन में बाधा Suspension of the Khilafat Movement

खिलाफत आन्दोलन में बाधा (Suspension of the Khilafat Movement)

खिलाफत आन्दोलन में बाधा (Suspension of the Khilafat Movement)–असहयोग आन्दोलन में रुकावट के बाद खिलाफत आन्दोलन भी अप्रासंगिक बन गया. तुर्की की जनता मुस्तफा कमाल पाशा के नेतृत्व में उठ खड़ी हुई और उसने नवंबर, 1922 में सुल्तान को सत्ता से वंचित कर दिया. मुस्तफा कमाल पाशा(Mustafa kemal Pasha) ने तुर्की के आधुनिकीकरण के लिए

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Chauri-Chaura Incident and Retreat of the Movement चौरी-चौरा काण्ड और आंदोलन की वापसी

चौरी-चौरा काण्ड और आंदोलन की वापसी (Chauri-Chaura Incident)

चौरी-चौरा काण्ड और आंदोलन की वापसी (Chauri-Chaura Incident and Retreat of the Movement)-5 फरवरी, 1922 को संयुक्त प्रांत के गोरखपुर जिले में चौरी-चौरा नामक स्थान पर एक कांग्रेसी जुलूस पर पुलिस ने गोली चलाई. जिस कारण भीड़ क्रुद्ध और उत्तेजित हो उठी. कुद्ध भीड़ ने पुलिस थाने पर हमला करके उसमें आग लगा दी. जिस

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खिलाफत और असहयोग आंदोलन Khilafat and Non-Cooperation Movement

खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन (Khilafat and Non-Cooperation Movement)

खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन (Khilafat and Non-Cooperation Movement)-1919 के वर्ष में भारत को ब्रिटिश सरकार द्वारा अनेक असंतोषजनक कष्ट दिए गए. रौलेट एक्ट जलियावाला बाग हत्याकाण्ड तथा पंजाब में झूठा फौजी शासन इस वर्ष के मुख्य असंतोषजनक कार्य थे. युद्ध के समय के भी उदारवादी वादे ब्रिटिश सरकार भूल चुकी थी. 1919 के अन्त

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हंटर कमेटी Hunter Committee in Hindi

हंटर कमेटी-जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच(Hunter Committee in Hindi)

हंटर कमेटी (Hunter Committee in Hindi)– जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए सम्पूर्ण देश में चल रहे जबरदस्त विरोध को देखते हुए सरकार ने मजबूरन 1 अक्टूबर, 1919 को लार्ड हंटर की अध्यक्षता में एक आयोग की स्थापना की. इस आयोग में 5 अंग्रेज सदस्य लार्ड हंटर, मि. जस्टिन रैकिन, मि. राइस, मेजर जनरल

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जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919 Jallianwala Bagh Tragedy 1919

जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919 (Jallianwala Bagh Tragedy 1919)

जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919 (Jallianwala Bagh Tragedy 1919)–सत्याग्रह का सम्पूर्ण देश में जबरदस्त प्रभाव पड़ा. देश भर में जन आंदोलन चल रहा था. ब्रिटिश सरकार इस जन आंदोलन को कुचल देने पर आमादा थी. बंबई, अहमदाबाद, कलकत्ता, दिल्ली और दूसरे नगरों में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बार-बार लाठियों और गोलियों का प्रहार हुआ तथा उन पर

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रौलेट एक्ट के विरुद्ध सत्याग्रह Satyagraha against Rowlatt Act

रौलेट एक्ट के विरुद्ध सत्याग्रह (Satyagraha against Rowlatt Act)

रौलेट एक्ट के विरुद्ध सत्याग्रह (Satyagraha against Rowlatt Act)-दूसरे राष्ट्रवादियों की तरह महात्मा गांधीजी को भी रौलेट एक्ट से गहरा धक्का लगा. फरवरी, 1919 में उन्होंने एक सत्याग्रह सभा बनाई, जिसके सदस्यों ने इस कानून का पालन न करने तथा गिरफ्तारी और जेल जाने का सामना करने की शपथ ली. सत्याग्रह ने फौरन ही आंदोलन

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