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खेड़ा सत्याग्रह, सरदार वल्लभभाई पटेल Kheda Satyagraha 1918

खेड़ा सत्याग्रह, सरदार वल्लभभाई पटेल (Kheda Satyagraha 1918)

खेड़ा सत्याग्रह, सरदार वल्लभभाई पटेल (Kheda Satyagraha 1918)–महात्मा गांधीजी ने 1918 में गुजरात के खेड़ा जिले के किसानों की फसल चौपट हो जाने के कारण सरकार द्वारा लगान में छूट न दिए जाने की वजह से सरकार के विरुद्ध किसानों का साथ दिया और उन्हें राय दी कि जब तक लगान में छूट नहीं मिलती […]

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अहमदाबाद की मिल हड़ताल Ahmedabad Mill Strike 1918

अहमदाबाद की मिल हड़ताल (Ahmedabad Mill Strike 1918)

अहमदाबाद की मिल हड़ताल (Ahmedabad Mill Strike 1918)–महात्मा गांधीजी का अगला प्रयोग 1918 में अहमदाबाद की एक कॉटन टैक्सटाइल मिल में मिल मालिक और मजदूरों के बीच मजदूरी बढ़ाने के सिलसिले में चल रहे विवाद में हस्तक्षेप करना रहा था. महात्मा गांधीजी ने मजदूरों की मजदूरी में 35 प्रतिशत की वृद्धि का समर्थन कर उन्हें

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चम्पारण सत्याग्रह,1917 Champaran Satyagraha in Hindi

चम्पारण सत्याग्रह,1917 (Champaran Satyagraha by Mahatma Gandhiji)

चम्पारण सत्याग्रह,महात्मा गांधी-1917 (Champaran Satyagraha by Mahatma Gandhi in Hindi) चम्पारण सत्याग्रह 1917 (Champaran Satyagraha by Mahatma Gandhi in Hindi)-1917 में महात्मा गांधी जी ने सत्याग्रह का पहला बड़ा प्रयोग बिहार के चम्पारण जिले में किया. चम्पारण की घटना उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में शुरू हुई थी. यहां नील के खेतों में काम करने वाले किसानों पर यूरोपीय

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महात्मा गांधीजी के प्रारम्भिक क्रियाकलाप और उनके विचार (Mahatma Gandhi's Early Activities and His Ideas)

महात्मा गांधीजी के क्रियाकलाप और उनके विचार (Mahatma Gandhi’s Activities)

महात्मा गांधीजी के प्रारम्भिक क्रियाकलाप और उनके विचार (Mahatma Gandhi’s Early Activities and His Ideas in Hindi) महात्मा गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन (Mahatma Gandhiji’s Early Life in Hindi)- मोहन दास करम चन्द्र गांधी(महात्मा गांधीजी) का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबन्दर नामक स्थान पर एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. महात्मा गांधीजी(Mahatma Gandhi)

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रौलेट एक्ट 1919 (Rowlatt Act)

रौलेट एक्ट 1919 (Rowlatt Act 1919 in Hindi) गांधीवादी युग

रौलेट एक्ट 1919 (Rowlatt Act 1919 in Hindi)–भारत सरकार भारतीयों को संतुष्ट करने के प्रयास करते समय भी दमन के लिए तैयार थी. युद्ध के पूरे काल में राष्ट्रवादियों का दमन, उन्हें जेलों में बन्द करना तथा फांसी पर लटकाना जारी रहा. मार्च, 1919 में सरकार ने रौलेट एक्ट पास किया, जिसका केन्द्रीय विधान परिषद्

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मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार Montague-Chelmsford Reforms in Hindi

मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार(Montague-Chelmsford Reforms in Hindi)

गांधीवादी युग का आरम्भ, 1919-47 (Beginning of the Gandhian Era) मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार(Montague-Chelmsford Reforms in Hindi)-1918 में ब्रिटिश सरकार के भारत मंत्री एडविन मांटेग्यू तथा वायसराय लार्ड चेम्सफोर्ड ने संविधान सुधारों की एक योजना का प्रस्ताव रखा, जिसके आधार पर 1919 को ‘भारतीय शासन अधिनियम’ बनाया गया. इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रांतीय विधायी परिषदों का आकार बढ़ा

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गांधीवादी युग-युद्धोत्तर कालीन स्थिति (Post War Situation)

गांधीवादी युग-युद्धोत्तर कालीन स्थिति (Post War Situation)

गांधीवादी युग का आरम्भ 1919-47 (Beginning of the Gandhian Era) गांधीवादी युग-युद्धोत्तर कालीन स्थिति (Post War Situation): प्रथम विश्व युद्ध (First world war) (1914-18) के दौरान एक नई स्थिति विकसित हो रही थी. देश में राष्ट्रवाद का तेजी के साथ विकास हो रहा था. राष्ट्रवादियों को युद्ध की समाप्ति के बाद बड़े-बड़े राजनीतिक लाभ मिलने

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क्रान्तिकारी आंदोलन (The Revolutionary Movement)

क्रान्तिकारी आंदोलन (The Revolutionary Movement)

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन-क्रान्तिकारी आंदोलन (The Revolutionary Movement) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन-क्रान्तिकारी आंदोलन (The Revolutionary Movement)–क्रान्तिकारी आतंकवादी आंदोलन उन्नीसवीं सदी के अन्त में और बीसवीं सदी के आरम्भ में चला था. यह उग्रराष्ट्रवाद की ही एक अवस्था थी. परन्तु ये लोग -पक्षीय राजनीतिक उग्रवाद से बिल्कुल भिन्न साधनों का प्रयोग करने पर विश्वास रखते थे. क्रान्तिकारी लोग

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प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय राष्ट्रवाद (World War-I & Indian Nationalism)

प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय राष्ट्रवाद (First world war in Hindi & Nationalism)

प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय राष्ट्रवाद (First world war in Hindi and Indian Nationalism) प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय राष्ट्रवाद (first world war in Hindi and Indian Nationalism)-प्रथम विश्व युद्ध जुलाई, 1914 में शुरू हुआ था. इसमें एक तरफ ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और जापान तथा दूसरी तरफ इटली, जर्मनी, आस्ट्रिया, हंगरी और टर्की थे. भारत

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उदारवादियों और उग्रवादियों के बीच सूरत की फूट Split between the Moderates and Extremists

उदारवादियों और उग्रवादियों के बीच सूरत की फूट

उदारवादियों और उग्रवादियों के बीच सूरत की फूट (Split between the Moderates and Extremists) सूरत की फूट, 1907 (Surat Split, 1907) 1906 ई. तक कांग्रेस के दो पक्ष उदारवादी और उग्रवादी काफी मतभेदों के बावजूद जिसमें से एक अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भी था, किसी तरह साथ-साथ चले. परन्तु 1907 के सूरत अधिवेशन में

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