सल्तनत काल

सल्तनत काल Sultanate era
मध्यकालीन भारत (MEDIEVAL INDIA)
भाग एक–सल्तनत काल

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु Alauddin Khilji death

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु(6 जनवरी, 1316 ई.) Alauddin Khilji’s Death

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु  Alauddin Khilji’s death-निरंकुश शक्तिशाली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) के अन्तिम दिन भयावह दुःख, क्लेश और बेबसी में बीते. यौवन काल और प्रौढ़ावस्था में इन्द्रिय सुखों के अपरिमित आनन्द, निरन्तर कठोर परिश्रम और मानसिक तनावों ने उसे समय से पूर्व ही वृद्धावस्था की ओर धकेल दिया और वह अधिकाधिक चिड़चिड़ा, झक्की […]

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अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार Alauddin khilji's administrative reform death

अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार | Alauddin khilji’s administrative reform

अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार Alauddin khilji’s administrative reform-कहा जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin khilji) प्रशासनिक क्षेत्र में महान् सेनानी था. राज्य के विषयों का प्रबन्ध करने में कोई भी मुसलमान शासक मुगलों से पूर्व ऐसा उदाहरण स्थापित न कर सका. शासन प्रबन्ध के विभिन्न क्षेत्रों में उसने बहुत से सुधार किए जिसमें से

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अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास (1296-1316 ई.) Alauddin Khilji in Hindi

अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास (1296-1316 ई.) Alauddin Khilji in Hindi

अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास (1296-1316 ई.) Alauddin Khilji in Hindi-अलाउद्दीन जिसे अली या गुरशस्प भी कहा जाता था, जलालुद्दीन खिलजी के भाई शहाबुद्दीन मसऊद खिलजी का पुत्र था. वह एक महत्वाकांक्षी पुरुष था तथा जलालुद्दीन खिलजी के समय उसने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए. अपने चाचा की हत्या करवा कर वह सुल्तान बना. उसका राज्यारोहण दिल्ली

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जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290-96 ई.) खिलजी वंश Jalaluddin firuz Khilji in hindi

जलालुद्दीन फिरोज खिलजी | खिलजी वंश | Jalaluddin firuz Khilji in hindi

जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290-96 ई.) खिलजी वंश Jalaluddin firuz Khilji in hindi -इस विषय में पर्याप्त विवाद है कि खिलजी कौन थे? फखरुद्दीन ने उन्हें तुर्क की 64 जातियों में से एक बताया है. विश्वास किया जाता है कि भारत में आने से पूर्व यह जाति अफगानिस्तान में हेलमन्द नदी के तटीय क्षेत्रों के उन

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कैकुबाद व शम्सुद्दीन (1287-90 ई.)kaikubad and shamsuddin in Hindi

कैकुबाद व शम्सुद्दीन (1287-90 ई.) Kaikubad and Shamsuddin in Hindi

कैकुबाद व शम्सुद्दीन (1287-90 ई.)kaikubad and shamsuddin in Hindi –बलबन ने अपने पौत्र खुसरो को अपना उत्तराधिकारी बनाया था, किन्तु दिल्ली के कोतवाल फखरुद्दीन ने कूटनीति से खुसरो को मुल्तान की सूबेदारी देकर बुगरा खाँ के 17 वर्षीय पुत्र केकुबाद (kaikubad) को सुल्तान बनाया.  उसने मुइजुद्दीन कैकुबाद की उपाधि धारण की. वह विलासी शासक सिद्ध हुआ

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गयासुद्दीन बलबन (1266-86 ई.) Ghiyasuddin Balban in Hindi

गयासुद्दीन बलबन (1266-86 ई.) Ghiyasuddin Balban in Hindi

गयासुद्दीन बलबन (1266-86 ई.) Ghiyasuddin Balban in Hindi–नासिरुद्दीन के साथ ही इल्तुतमिश के ‘शम्शी वंश’ का अन्त हुआ व ‘बलवनी वंश‘ का सल्तनत पर अधिकार हो गया. बलबन सल्तनत काल का सबसे योग्य, सक्षम और प्रभावशाली शासक हुआ. गयासुद्दीन बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन बलबन था. उसे ख्वाजा जमालुद्दीन वसरी नामक व्यक्ति खरीद कर 1232-33

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नासिरुद्दीन महमूद (1246-66 ई.) Nasiruddin Mahmud in Hindi

नासिरुद्दीन महमूद (1246-66 ई.) Nasiruddin Mahmud in Hindi

नासिरुद्दीन महमूद (1246-66 ई.) Nasiruddin Mahmud in Hindi -1236 से 1246 ई. तक के काल में नासिरुद्दीन महमूद राज्य में अमीरों या तुर्क सरदारों की शक्ति का प्रभाव देख चुका था. अतः उसने राज्य की समस्त शक्ति बलबन को सौंप दी. अगस्त 1249 ई. में बलबन ने अपनी पुत्री का विवाह नासिरुद्दीन महमूद से कर

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अलाउद्दीन मसूद शाह (1242-46 ई.)Alauddin masud Shah in Hindi

अलाउद्दीन मसूद शाह (1242-46 ई.)Alauddin masud Shah in Hindi

अलाउद्दीन मसूद शाह (1242-46 ई.)Alauddin masud Shah in Hindi -अलाउद्दीन मसूद शाह बहराम शाह के भाई रुक्नुद्दीन फिरोजशाह का पुत्र व इल्तुतमिश का पौत्र था. उसके समय में तुर्क सरदार सर्वोच्च बने रहे तथा मसूद शाह के पास केवल सुल्तान की उपाधि मात्र ही रह गई. ‘नाईब-ए-मुमलिकत‘ के पद पर तुर्क नेता मलिक कुतुबुद्दीन हसन

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मुईजुद्दीन बहराम शाह (1240-42 ई.) Muiz ud din Bahram shah

मुईजुद्दीन बहराम शाह (1240-42 ई.) Muiz ud din Bahram shah

मुईजुद्दीन बहराम शाह (1240-42 ई.) Muiz ud din Bahram shah–रजिया सुल्ताना के पश्चात् तुर्क सरदारों ने उसके भाई व इल्तुतमिश के तीसरे पुत्र मुईज्जुद्दीन बहराम शाह(Muiz ud din Bahram shah) को सुल्तान बनाया. मुईजुद्दीन बहराम शाह (1240-42 ई.) Muiz ud din Bahram shah–रजिया सुल्ताना के पश्चात् तुर्क सरदारों ने उसके भाई व इल्तुतमिश के तीसरे

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रजिया सुल्ताना (1236-40 ई.) Razia Sultana in hindi

रजिया सुल्ताना (1236-40 ई.) Razia Sultana in hindi

रजिया सुल्ताना (1236-40 ई.) Razia Sultana in hindi– रजिया सुल्ताना दिल्ली के अमीरों तथा जनता के सहयोग से सिंहासन पर बैठी थी. अतः अन्य तुर्क सरदार जैसे निजामुल मुल्क जुनैदी, मलिक अलाउद्दीन जानी, मलिक सैफुद्दीन कूची, मलिक ईनुद्दीन कबीर खाँ अयाज एवं मलिक इजुद्दीन सलारी आदि रजिया के प्रबल विरोधी बन गए. रजिया सुल्ताना ने बड़ी बुद्धिमत्ता

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